Thought of the day

Sunday, 18 November 2007

शास्त्री JC Phillip बेनकाब हुए

कल शास्त्री JC Phillip का लिखा लेख पढ रहा था। और किसी का लेख मैं उडती नज़र से भी पढ देता था, पर शास्त्री जी का नहीं। यही सोचता कि कुछ तो सीखने को मिलेगा। पर कल जो पता लगा वो मुझे अन्दर तक हिलाने के लिए काफी था।

उनके एक लेख ‘
ईश्वर की ताबूत का आखिरी कील !’ पर ‘arvind’ की प्रतिक्रिया पढी तो मन को बहुत संतोष हुआ। जिस तरह बेबाक होकर उसने शास्त्री जी को बताया कि उनका कोई ‘प्रयोजित मकसद’ भी है, मैं उसका कायल हो गया। सोचा कि जलती आग में दो लकडियाँ मैं भी डाल दूँ और बता दूँ दुनिया को उनका असली चेहरा।

एक दिन उन्हें मेल क्या लिखी कि ‘मेरे ब्लॉग कि बेहतर करने की राय दो’, उनका तो फोन ही आ गया। पता चला कि वे अपने शहर से बाहर हैं पर शौक है कि अच्छे लेखक सामने आएं। पर अपने पैसे खर्च करके मेरे फायदे की बात - ‘प्रयोजित मकसद’ !?!

बात अभी रुकी नहीं साहब – जब दुविधा में होता हूँ, उन्हें मेल भेजता हूँ और तुरंत जवाब आ जाता है समाधान के साथ - ‘प्रयोजित मकसद’

कितना आसान हो गया है हिन्दुस्तान में “Freedom to speak” से। किसी की बात पस्न्द नही आए तो उसके मुँह पर थूक दो। और ज्यादा कडवाहट है तो झट से बता दो कि तूँ हमारे धर्म का नहीं इसलिए तेरे पास है ‘प्रयोजित मकसद’। शुक्रिया ‘arvind’ तुम नहीं होते तो कितना कुछ मेरे अंदर घुटा-घुटा सा रह जाता। पर तुम्हारे ‘प्रयोजित मकसद’ ने मेरा मकसद हल कर दिया।

और देख लो शास्त्री जी जैसा आप सिखाते हो यह लेख भी 255 शब्दों मे पूरा। यह दो लाइन ‘प्रयोजित मकसद’ के नाम पर ऐकस्ट्रा।
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5 comments:

  1. प्रायोजित मकसद के बारे में कुछ खुलासा करते तो ठीक था बंधु. आपने अपनी एक पिछली पोस्‍ट में जो बातें लिखी हैं, क्‍या यह पोस्‍ट उनके खिलाफ नहीं है? आपको असहमति है तो वहीं कह कर आते, ज्‍यादा अच्‍छा होता. इस पोस्‍ट का मतलब कुछ समझ नहीं आया.

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  2. दो बातें मित्र -

    पहली कि जब शास्त्री जी स्वयं किसी बात का उत्तर दे चुके तो मेरा क्या सामर्थ्य।

    दूसरी बन्धु, मैं आज भी सबसे यही कहना चाहता हूँ कि अगर आप असहमत हैं तो किसी के मुँह पर थूकने जैसा तो मत लिखो।

    हद यह कि लोग बेनाम (या गलत नाम से) होकर जवाब दे देते हैं कि उन्होंने जवाब दे दिया और जवाबदारी खत्म।

    फिर भी आपने जो इंगित किया ध्यान रखूँगा।

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  3. "God is Faith . Those who get what they seek, have faith and live by it and justify the existence of God. Those who do not get what they seek , loose faith and justify the non - existence of God .
    God is nothing but short form for “Goodness” that you do to yourself and others"
    Shastri J C Philip may not be a hindu but he is an Indian which makes him as good and devout as we are. Besides that he is open and helping to one and all but to expect him to help us "as we want him to help " is expecting too much . All those who dont like christans and christanity should not go this blog at all because for every one blog is not above faith.His blog is open to one all but that does not mean that you should go and " tell him what to do" its an genral indian practice to tell the other what is right and what is wrong but never make rules for your own self .
    I appreciate your writing this article

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  4. यह धर्म के मामले में थोड़ा संयम बरतना ठीक रहता है! शास्त्रीजी पर शक हम भी कर चुके हैं पैर क्या वेह धरम की वजह से था! नहीं

    आपने बात दर्ज़ की अच्छा है

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  5. हिडन अजेंडे के साथ कई लोग चिट्ठाकारी में उतरे हैं, शास्त्रीजी उनमें से एक हैं। मज़े की बात यह कि हिन्दी से हिंदुस्तान का भला होगा का नारा लगाते लगाते वे ये समझ बैठे कि कोई उनका यह अजेंडा ताड़ नहीं पायेगा। ज़ाहिर तौर पर वो क्या लिख रहे हैं इस पर कोई आपत्ति नहीं, लिखना उनका हक है, पर अपना अजेंडा साफ रखना चाहिये था, ईसा के चरणसेवक हैं तो डंके की चोट पर लिखते। कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिये।

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Sanjay Gulati Musafir

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