Thought of the day

Monday, 24 December 2007

हिन्दु आतंकवाद – नहीं आता मुझको

साहब मैं हिन्दू हूँ और शायद जो अपने आप को कट्टरवादी कहते हैं उनसे बेहतर कट्टरवादी हूँ। वो इस तरह के वे तो केवल शोर करते हैं हिन्दु-हिन्दु का बस। पर मैं केवल अनुसरण करता हूँ बस, शोर नहीं करता।

फिर भी - कल क्रिसमस है आज से हमारे घर में हलचल शुरू है। जब ईद हो तब भी मैं खोज कर मित्रों को बधाई देता हूँ।

कहाँ लिखा है हिन्दु धर्म में कि अन्य धर्मों का या मान्यताओं का सम्मान मत करो। मेरे लगभग हर 5-6 लेखों के बाद हिन्दु होने के गौरव की बात मिलेगी। तो क्या हिन्दु होने के नाम पर आतंकवाद शुरू कर दूँ।

अगर महान हो तो ऊपर उठो - उदाहरण बनो कि लोग आप जैसा जीवन जीना चाहें।

तोडफोड, कीचड उछालना - धर्म हो ही नहीं सकता।

इंसान जब पैदा होता है तो केवल एक धर्म होता है उसका - ईश्वर की संतान। और बडा होते होते क्या बन जाता है - राम की संतान, रहीम की संतान, जीसस की संतान। कुछ नहीं कर रहे - सिर्फ अपनी पहचान खो रहे हो।

मैं जानता था यह विवाद खडा होगा ही - अब जिनका काम ही है नारे लगाना, शोर मचाना - करने दो। उनकी भी तो रोजी- रोटी है।
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4 comments:

  1. आप सही कह रहे हैं. हिन्दू धर्म दुनियां का सबसे विशाल-हृदय धर्म है, एवं हिन्दुस्तान दुनियां का सबसे विशाल-हृदय देश है. सारी दुनियां के पीडित लोग भाग कर यहीं आते थे.

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  2. मित्र अच्छा लगा सुनकर कि कोई तो है जो अपने को हिंदु मानता है और सार्वजनिक घोषणा भी करता है,पर गाहे बगाहे हिंदु आतंकवाद जैसी बातें बोलना ,लिखना क्या आवश्यक है ,कहां है हिंदु आतंकवाद,किसी ने कुछ लिखा और आप ने लिख मारा हिंदु आतंकवाद.उनके कोइ विचार थे आप को नहीं जंचे मुझे भी नहीं जंचे पर इसमें हिंदु आतंकवाद कहां से आ गया ....थोङा विचार करें

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  3. मित्र
    आप सही कह रहे हैं। असल में किसी पोस्ट पर जवाब दिया था और उसे बिना संशोधित किए यहाँ प्रस्तुत कर दिया, इस कारण चर्चा शून्य से आरम्भ होती लगती है!

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  4. आतंकवाद किसी का अच्छा नहीं होता। चाहे वह हिंदू का हो या किसी और का।

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Sanjay Gulati Musafir

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