Thought of the day

Tuesday, 4 December 2007

माया की माया

13 अक्तूबर 2007 को मैंने अपने एक पत्र में लिखा -

... As far as Mayawati is concerned, what she is doing and she might do in her tenure is quite evident from her swearing in chart! Wonder what she does in Jan 2008! अर्थात – जो मायावती कर रही है और अपने इस कार्यकाल में करेगी वह तो उसके शपथ-ग्रहण से बिल्कुल स्पष्ट है! देखना तो यह है कि वह जनवरी 2008 में क्या करती है!

यदि मायावती की शपथ-ग्रहण की कुण्डली पर नजर डालें तो कुछ बातें बहुत स्पष्ट दिखती हैं –

* चाहे वह स्वयं कुछ भी दावा करें पर कुण्डली तो दिखा ही रही है कि यह कार्यकाल पूरी तरह से बदले की भावना से प्रेरित रहेगा। कुछ तो चढ चुके और देखें कौन और कितने इस बलि-वेदी पर चढाए जाते हैं।

* “हाथी नहीं गणेश है..” इस नारे ने उत्तर प्रदेश की सत्ता तो बहुमत से दे दी। अब देखना यह है कि पिछडे वर्ग की मसीहा कब अन्य जाति व वर्ग के लोगों को अपने विरुद्ध करेंगी और कैसे!

* राज-मद भी बहुत बुरी चीज है। एक ओर तो सपने दिल्ली की गद्दी के दिखाता है वहीं कुछ न सुलटने वाली गलतियाँ भी करवा ही देगा।

बहुत कुछ और भी कहा जा सकता है जो स्पष्ट दिख रहा है। पर देखिए न माया की माया कि सब दिख रहा है पर बोल नहीं सकता।

अन्य लेख –
India: Visible Trends of Samwat 2064 (Year 2007 – ...
Pakistan: Can they learn something from India
मुशर्रफ मियाँ – अब राह नहीं है आसान
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4 comments:

  1. राजनीतिक भविष्यवाणी करना जोखिम भरा काम होता है। हालांकि यदि सच हो जाए और सध जाए तो कम से कम ज्योतिषियों के लिए तो यह फायदेमंद साबित होता है।

    आपने मायावती के संबंध में कहा, "अब देखना यह है कि पिछडे वर्ग की मसीहा कब अन्य जाति व वर्ग के लोगों को अपने विरुद्ध करेंगी और कैसे!"

    'पिछड़ा वर्ग' शब्द का एक खास संवैधानिक अर्थ है। मायावती उस अर्थ में पिछड़े वर्ग की नेता नहीं हैं। उनके जातीय समीकरण में राजपूतों के अलावा पिछड़े वर्ग ही उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं।

    आपने कहा, "बहुत कुछ और भी कहा जा सकता है जो स्पष्ट दिख रहा है। पर देखिए न माया की माया कि सब दिख रहा है पर बोल नहीं सकता।"

    आपको किस बात का भय है -- मायावती के कोप का या फिर अपनी बात झूठ साबित होने का ?

    मेरी दिलचस्पी यह जानने में है कि केन्द्र में गठबंधन की राजनीति का दौर किस वर्ष समाप्त होगा? आपको निकट भविष्य में ऐसा किस वर्ष होने की संभावना दिखाई देती है जब केन्द्र में कोई भी गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होगा और एक बड़े संवैधानिक संकट की स्थिति आएगी? यदि आप इस बात की स्पष्ट गणना और व्याख्या कर सकें तो ज्योतिष के क्षेत्र में यह अत्यंत महत्वपूर्ण भविष्यवाणी होगी।

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  2. आशा है आपने "बदलती ग्रह स्थिति, बदलते समीकरण" लेख पढा होगा।

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  3. जी हां, आज दोबारा पढ़ लिया। उस दिन भी पढ़ा था। मेरे प्रश्न का संबंध आगामी पांच-सात वर्षों में केन्द्रीय राजनीति में होने वाले दूरगामी बदलाव से है। तात्कालिक महत्व के सत्ता- परिवर्तनों से आम जनता को खास फर्क नहीं पड़ता।

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  4. मित्र
    असल में मैं आपके प्रश्न का भाव नहीं समझ पाया था। जल्द ही एक लेख इस विषय पर लिखूँगा।

    धन्यवाद

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Sanjay Gulati Musafir

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