Thought of the day

Saturday, 29 December 2007

क्या हुआ गर नववर्ष आ गया तो

हर साल दिसम्बर का अखिरी हफ्ता क्या शुरू होता है कि बधाई संदेशों और नववर्ष के संकल्प की चर्चाओं से हवा भारी होने लगती है। पर क्या परिवर्तन आया आपके जीवन एक साल बदलने से। कुछ नहीं – आखिर क्यों होता है ऐसा?

यह मेरी पुस्तक ‘Getting Basics Right in Astrology’ से उद्धृत है और मेरे पसंदीदा लेखों में से एक है। हिन्दी रूपांतर नीचे है।

Is there any difference between wishful thinking and Dream? It is just same as it is between desire and decision! Most people live in the world of wishful thinking and believe that it is their dream. Dream is something that doesn’t allow you to eat sleep or rest until you achieve it. A dream remains wishful thinking until you take a decision to see your dream come true.
रूपांतर –
क्या कुछ फर्क है – सपने और चाह में? बस उतना ही जितना इच्छा और इरादे में। अधिकतर लोग चाह लिए जीते जाते हैं, इस भ्रम के साथ कि वह उनका सपना है। सपना वह है जो आपको तब तक चैन से बैठने, सोने खाने न दे, जब तक वह पूरा न हो जाए। जब तक सपने को पूरा करने का इरादा न कर लिया जाए तब तक वह केवल चाह भरा विचार ही बना रहता है।

तो मित्रों अब अगर जीवन में कुछ बदलना है तो विचार मत करें, इरादा करें। नहीं तो एक साल और आएगा और चला जाएगा।



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Sanjay Gulati Musafir

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