Thought of the day

Friday, January 9, 2009

दशा ही दिशा है

लोग कुण्डली से मूलभूत फलित कर पाते हैं। अटकते वे वहाँ हैं जब दिखने वाली घटनाओं को समयबद्ध करना हो।

बाज़ार में अधिकतर पुस्तकें विषय पर या तो बहुत ही शुरुआती जानकारी देती या फिर विषय की गूढ गहराइयों के बारे में। इससे एक खाई सी पैदा हो रही है, उनके लिए जिनका विषय में रुझान तो बन गया पर विशिष्टता की ऊँचाई तक ले जाने का कोई सुलभ साधन नहीं। यह पुस्तक उस दूरी को पाटने में आपकी सहायता करती है।

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