Thought of the day

Sunday, 18 October 2009

बदलते आयाम

आज से कुछ दशक पूर्व मुझे लगता था कि “मैं किसी भी एक व्यक्ति के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन ला सकूँ तो बहुत बडी बात होगी”।

आज मैं अपने ही ख्यालों में खोया टहल रहा था कि अपनी इसी बात पर मंथन करने लगा।

बस एक छोटा सा फर्क आ गया है –

आज मैं जानता हूँ कि एक जीवन काल में लाखों-लाखों जीवन को छुआ जा सकता है।

किंतु, यदि मैं किसी के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन ला सकता हूँ तो वह केवल एक है – स्वयं अपने।

सोच आज भी वही है, बस नए आयाम जुड गए हैं।
Related Articles:


2 comments:


  1. उम्दा सोच!!



    सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

    -समीर लाल 'समीर'

    ReplyDelete
  2. बहुत बढिया विचार।

    ReplyDelete

Thanks for your comments
Sanjay Gulati Musafir

Copyright: © All rights reserved with Sanjay Gulati Musafir