Thought of the day

Wednesday, November 7, 2007

क्या माँगू माँ तुमसे आज ...

जगमग जगमग दीप जले हैं
दीपों से उत्साह चले है
देखूँ जिस ओर भी आज
कौतूहल का ही है राज
क्या माँगू माँ तुमसे आज ...

रात अमावस मन हर्षाए
पूनम सी मादकता लाए
देखूँ जिधर माँ तूँ मुस्काए
कर लो अब बस तुम स्थिर वास
क्या माँगू माँ तुमसे आज ...

ज्ञान तुम्ही विज्ञान तुम्ही हो
मन को भरमाता अज्ञान तुम्ही हो
वो माया जो छल छल जाए
उस माया की माया भी हो
खोलो हृदय पटल तो आज
क्या माँगू माँ तुमसे आज ...

उल्लूक की करो सवारी
मत आना यूँ हे माँ प्यारी
घर मेरा मंदिर हो जाए
माँ जब तूँ गरुड पर आए
हे माँ विष्णु संग बिराज
क्या माँगू माँ तुमसे आज ...
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9 comments:

  1. बढिया रचना है।बधाई।

    रात अमावस मन हर्षाए
    पूनम सी मादकता लाए
    देखूँ जिधर माँ तूँ मुस्काए
    कर लो अब बस तुम स्थिर वास
    क्या माँगू माँ तुमसे आज ...

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  2. बहुत सुन्दर रचना ! दीपावली की रात " घर मेरा मंदिर हो जाए, माँ जब तूँ गरुड पर आए " आपकी मनोकामना पूरी हो .

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  3. बहुत उत्तम. अवश्य मंदिर होगा और माँ आयेंगी गरुड़ पर विराजमान होकर.

    दीपावली मंगलमय हो, बहुत शुभकामनायें.

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  4. * दीपावली की बहुत शुभकामनाएँ *
    ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
    दीवाली की मँगल कामना तथा साल मुबारक स्वीकारेँ ...
    ये तथ्य सही लिखा कि माँ महालक्ष्मी गरुड पर महाविष्णु के सँग आतीँ हैँ तभी
    चिर स्थायी हो जातीँ हैँ - पावन भावनाएँ लिये माँ की स्तुति बहुत पसँद आयी
    - लावण्या

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  5. वाह ज्योतिषी जी आप तो कवि भी हैं । माँ लक्ष्मी आप की मनोकामना पूरी करें ।

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  6. बल्कि यों कहें-- लक्ष्मी मैया, मैं आपसे कुछ माँगना नहीं, देना चाहता हूँ, कृपया मेरी 'दरिद्रता, आलस्य और अकर्मण्यता' ले जाएँ!

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  7. कवि पहले या
    ज्योतिषी पहले
    या सब साथ में
    क्या हैं आप
    किसे पहले मान लें ?

    मुसाफिर आप
    सफर भी आप
    आप ही आप
    किसे पहले जान लें ?

    जिज्ञासा आप
    हल भी आप
    सब हैं आप
    निर्णय कौन जान लें ?

    पहले पहचान लें
    पहले पहचान दें
    जान लें पहचान लें
    रचना संरचना मान लें.

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  8. बहुत बढ़िया, मर्म भी धर्म के मूल में है - बधाई

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  9. युग परिवर्तन की यह बेला आपको सपरिवार मंगलमय हो | शिव की शक्ति, मीरा की भक्ति, गणेश की सिद्धि, चाणक्य की बुद्धि, शारदा का ज्ञान, कर्ण का दान,राम की मर्यादा, भीष्म का वादा, हरिश्चंद की सत्यता, लक्ष्मी की अनुकम्पा एवम् कुबेर की सम्पन्नता प्राप्त हो यही हमारी शुभकामना है |

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Sanjay Gulati Musafir

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