Thought of the day

Monday, 26 November 2007

जीवनसाथी से बढते विवाद - क्या करें 5

स्त्रियाँ स्वाभाव से ही कोमल होती हैं। यह मान लेना कि वे भावनात्मक स्तर पर मजबूत हैं सबसे बडी भूल है। खासतौर पर अगर कामकाजी महिला है तो उसकी भावनात्मक जरूरत आम महिला से अधिक होगी।

जैसा कि मैं कल जिक्र कर चुका कि स्त्री जब परेशान हो या थकी हो तो बात करके खुद को चुस्त करती है। ऐसे में आमतौर पर औरत को सबसे शिकायत होती है – सब्जी वाला, दूध वाला, किरयाना वाला, पडोसी, दफ्तर में पानी पिलाने वाले से लेकर बॉस तक – सभी से वह परेशान है। लेकिन रुकिए...

आप क्या कर रहे हैं! समझाइए मत! वह किसी से परेशान नहीं है। यह तरीका है औरत का अपनी परेशनी निकालने का। मगर आप और मैं लग जाते हैं समझाने। और बात कहाँ पहुँच जाती है - “तुम कौन सा मेरी सुनते हो” तक।

सच मानिए वह परेशान है, पर वह इतनी सशक्त भी है कि अपनी समस्याएँ खुद सुलझा ले। आप यदि मदद ही करना चहते हैं तो उन्हें कहने दीजिए और आप सुनते रहिए। जब वे जवाब के लिए आपकी ओर देखे तो आप का उत्तर होना चाहिए “मैं समझ सकता हूँ। मैं तुम्हारी जगह होता तो शायद संभव नहीं था, पर जानता हूँ तुम इतनी समझदार हो कि संभाल लोगी। मैं तुम्हारे साथ हूँ”

बस यही तो चाहिए था। कोई अपना जो उसके दिल की बात सुन सके और बता सके कि वह सही है। याद है वह स्त्री जो मेरे ऑफिस में दनदनाती घुसी और मैंने क्या जवाब दिया था (पढें)। चर्चा कल आगे बढाऊँगा।

इसी क्रम में पिछले लेख -
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2 comments:

  1. कामकाजी महिला है तो उसकी भावनात्मक जरूरत आम महिला से अधिक होगी। --- मै इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूँ. 13 साल तक मै कामकाजी थी और पिछले साल से आम महिला हूँ. भावात्मक ज़रूरत औरत की ही नहीं पुरुष की भी होती हैं यह मैं अपने अनुभव के साथ कह सकती हूँ ...ज़रूरत कम ज़्यादा हो सकती है यह अलग बात है..

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  2. आज कई दिन के बाद आपके चिट्ठे पर आया एवं जीवनसाथी परम्परा को पूरा पढ गया.

    आपका लेखन उपयोगी एवं सटीक है. यदा कदा लोग आप से असहमत होंगे क्योंकि हरेक की अपनी सोच है. लेकिन लेखों की भावना से पूरी तरह कोई भी व्यक्ति असहमत नहीं होगा.

    सिर्फ एक शिकायत है आप से -- यह लेख ज्योतिष परिचय पर नहीं बल्कि विवाह संबंधी चिट्ठे पर होना चाहिये था.

    क्यों नहीं आप सफल पारिवारिक जीवन पर एक चिट्ठा चालू करके ये लेख एवं इस विषय पर आगे के लेख वहां दे.

    याद रखें ज्योतिष चिट्ठे पर कोई भी इन लेखों को नहीं तलाशेगा. लेकिन पारिवारिक जीवन पर एक विषयाधारित चिट्ठा बना देंगे तो लोग आज भी उसे पढेंगे, कल भी !!!

    -- शास्त्री

    हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.
    हर महीने कम से कम एक हिन्दी पुस्तक खरीदें !
    मैं और आप नहीं तो क्या विदेशी लोग हिन्दी
    लेखकों को प्रोत्साहन देंगे ??

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Sanjay Gulati Musafir

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