Thought of the day

Wednesday, 26 December 2007

सपने – कुछ कहना चाहते हैं आपसे

कुछ दिन पहले किसी लेख में पढा कि ‘सपनों का अनुवाद’ अब विज्ञान बन गया है। मेरा सवाल तो बस इतना है कि यह तो सदा से ही विज्ञान था। और शायद मेरे कथन को किसी की प्रमाण की जरूरत ही नहीं। विज्ञान इस तथाकथित वैज्ञानिक-युग से पहले भी था। हमने अपनी संस्कृति से अगर मुँह मोड रखा है तो दुर्भाग्य हमारा है।

जब मैं विदेशों मे होता हूँ या विदेशियों से मिलता हूँ, तो उनकी लगन देखकर दुःख भरी प्रसन्नता होती है। यह सोच कर कि जिन विद्याओं का स्वयं भारतीय तिरस्कार कर रहे हैं, विदेशी किस उत्सुकता से उन्हीं विद्या की गहराइयों को समझने/सीखने का प्रयास कर रहे हैं – मन में सुख-दुःख की समानांतर लहर दौड जाती है। मित्रो सूर्य तो आकाश में ही है और रहेगा भी – हम उसे माने या न माने

जहां तक प्रश्न है सपनों के अनुवाद का – वह इतना आसान नहीं, जैसा कि कुछ लोगों ने दुकान लगा कर तमाशा बना रखा है। यह देखा तो यह होगा, वह देखा तो वह होगा – केवल इतना सीमित नहीं है सपनों का पडना या समझना। इसे बारीकी से संदर्भों में समझना पडता है। एक ही सपना दो व्यक्तियों के लिए अलग-अलग अर्थ लिए हो सकता है।

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शकुन विचार

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4 comments:

  1. सपनों पर अगर और जानकारी मिले तो बहुत आभार होगा...इस विषय पर विस्तार से जानने के लिए मैं उत्सुक हूँ ...

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  2. मीनाक्षी जी,
    प्रयास करूँगा कि और मह्त्त्वपूर्ण जानकारी दे सकूँ। यहाँ यह कहना भी आवश्यक समझता हूँ कि एक ही सपना दो व्यक्तियों के लिए अलग-अलग अर्थ लिए हो सकता है।

    उदाहरण के लिए - सपने में साँप का दिखना बहुत अलग-अलग अर्थ रखता है।

    संजय गुलाटी मुसाफिर

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  3. sanjay jii,aapse is mutaaliq baat to hui hai meri aur bahut kuch mun halka bhi hua thaa...magar fir bhi is vishay par zaruur kuch likhye...intzaar rahegaa..shukriya

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  4. आप के लेख से भी सहमत हूँ और इस बात से भी कि सपना हरेक के लिए अलग अलग भविष्य वाणी करता है। और अधिक प्रकाश डाले।इंतजार रहेगा।

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Sanjay Gulati Musafir

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